इतना टूटा हूं कि
इतना टूटा हूं किशब्द भी साथ छोड़ देते हैंखामोशी बोलने लगती है रास्ते धुंधले से हैंकदम पहचान खो बैठे हैंपर
Read Moreइतना टूटा हूं किशब्द भी साथ छोड़ देते हैंखामोशी बोलने लगती है रास्ते धुंधले से हैंकदम पहचान खो बैठे हैंपर
Read Moreकाली आँधी मेंदीपक फिर भी जलताहौसला जागे नफरत के स्वरदीवारें ऊँची करतेमन रोता है सूखे पेड़ों परचिड़ियाँ लौट आतींआशा बचती
Read Moreऋतु बदली हैपर जड़ों की नमीवैसी ही है पीले पत्तों मेंजीवन की थकानधीरे उतरी डाली ने फिरनव हरियाली कोगले लगाया
Read Moreनीले सागर मेंचुपचाप बहती हवामन भी भीगा लहरों की धुनपुरानी यादों जैसामधुर कंपन डूबता सूरजअधूरी बातों कासुनहरा रंग भीगी पलकों
Read Moreकागज़ की कश्तीभीगी नदियों पर चलती हैबालपन की हँसी मेंसमय तैरता जाता है छोटे से हाथों की दुनियाबड़ी उम्मीदें समेटे
Read Moreबादलों के पारचुपचाप चलता मनहवा भी धीमी पहाड़ों की गोदसपनों की सीढ़ियाँचढ़ती साँसें धूप का स्पर्शचट्टानों पर लिखेधैर्य के शब्द
Read Moreसंस्कारों की धूप मेंपलता है मन का वृक्षरीतियाँ देती हैं छाँव घर की देहरी परदीपक सा उजाला हैपरंपरा की बात
Read Moreधूप में तपकरसीखा है जीवनरास्ता अपना काँटों की चुभनमुस्कान सिखातीसहना हरदम गिरकर संभलनाहर हार के बादजीत का स्वाद वक़्त की
Read Moreमौन सा सागरगहराई में छुपेअनकहे सपने कठोर सा रूपभीतर कोमल मनछांव सा स्नेह थामे हर दर्दहोंठों पर मुस्कानअडिग सा वृक्ष
Read Moreतजूर्बाचुपचाप चलकरज़िंदगी की किताब खोलता है गिरनाकमज़ोरी नहीं होतासमझ का पहला दरवाज़ा होता है हर चोटएक अनकही सीख हैजो भीतर
Read More