Author: डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पर्यावरण

शहरी पर्यावरण कवच: वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता

शहरीकरण आधुनिक सभ्यता के विकास की सबसे प्रमुख विशेषता बन चुका है। यह आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विस्तार, रोजगार सृजन और

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हाइकु/सेदोका

हत्या का कलंक न लगे रिश्तों में

रिश्तों की डोरधीरे-धीरे टूटे,शब्दों की मार। मन के आँगनविश्वास के दीपकक्यों बुझ जाते। चेहरे हँसते,भीतर मौन हिंसाघर बना लेती। क्रोध

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हाइकु/सेदोका

नफरतों की आँधी से डराने की कोशिश ठीक नहीं है

काली आँधी मेंदीपक फिर भी जलताहौसला जागे नफरत के स्वरदीवारें ऊँची करतेमन रोता है सूखे पेड़ों परचिड़ियाँ लौट आतींआशा बचती

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हाइकु/सेदोका

वृक्ष पत्तियाँ बदलते हैं, जड़ें नहीं

ऋतु बदली हैपर जड़ों की नमीवैसी ही है पीले पत्तों मेंजीवन की थकानधीरे उतरी डाली ने फिरनव हरियाली कोगले लगाया

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हाइकु/सेदोका

सागर में उठने वाली हरेक लहरें तड़पाती हैं

नीले सागर मेंचुपचाप बहती हवामन भी भीगा लहरों की धुनपुरानी यादों जैसामधुर कंपन डूबता सूरजअधूरी बातों कासुनहरा रंग भीगी पलकों

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