Author: डॉ. अशोक कुमार शर्मा

हाइकु/सेदोका

जितना ज़रूरी है

जितना ज़रूरी,भोर की पहली किरण,जागे विश्वास। सूखी धरती,बादल का कोमल स्पर्श,जीवन हँसे। नन्हा सा दीप,अँधियारा हार गया,मन उजियारा। मौन प्रार्थना,हवा

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हाइकु/सेदोका

समय की अहमियत

भोर की किरण,क्षणों का उपहार,जीवन जागे। बहती नदी,रुकती नहीं कभी,समय कहे। सूखा पत्ता,हवा संग उड़ता,पल बीते। खिला सुमन,संध्या में झरता,काल

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हाइकु/सेदोका

रोपनी में रौंदल देहिया

माटी की खुशबू,रोपनी में झुकी देहिया,बरखा मुस्काई। धान के नन्हे पौधे,हाथों में सपनों की हरियाली,धरती गुनगुनाए। कीचड़ भरे पग,फिर भी

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शिक्षा एवं व्यवसाय

शिक्षा पर पहरा नहीं, समान अवसर का सवेरा चाहिए

किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी आर्थिक समृद्धि, ऊँची इमारतों या आधुनिक तकनीक से नहीं आँकी जाती, बल्कि इस

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हाइकु/सेदोका

शाश्वत की सुगंध

ओस की बूँद,भोर मुस्काए,सुगंध अमर। वन की साँस,पत्ते गुनगुन,जीवन जागे। नभ निर्मल,चिड़िया का स्वर,मन महके। शांत सरिता,लहरें बोलें,काल ठहरे। फूल

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हाइकु/सेदोका

यत्र तत्र सर्वत्र

यत्र तत्र,जीवन की धुन,प्रकृति गाए। शीतल पवन,पत्तों की भाषा,मन मुस्काए। नीला गगन,उड़ते पंछी,स्वप्न सजाएँ। ओस की बूँद,सूरज की किरण,मोती बन

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हाइकु/सेदोका

इरादों में कमी कैसे आई

धूप मुस्काई,मन ने पूछा चुप—इरादे कहाँ? सूना पथ था,पत्ते बोले धीरे—कदम ठिठके। ओस की बूँद,साहस फिर चमका—भोर जागी। ऊँचा पर्वत,नज़र

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हाइकु/सेदोका

प्रकृति की गोद में

ओस की बूँदपत्ती मुस्काईभोर जागी नभ नीला हैपंछी गुनगुनाएँमन महके नदी बहेलहरें गाएँसपने तैरें शीतल पवनवन मुस्काएफूल झरें बादल आएधरती

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