जय श्री राम
बस झूठी मत माला जापें।
बाकी चाहे राग अलापें।।
राम नाम नहिं ओट मिलेगा।
साथ नहीं अब और निभेगा।।
इतना पाप करो मत भारी।
फल मिलना निश्चित गद्दारी।।
कोई काम नहीं आयेगा।
सिर्फ अकेला रह जायेगा।।
इतना जो तुम बोल रहे हो।
मर्यादा से डोल रहे हो।।
क्या रावणी भूत है पकड़ा।
दूषित भाव बहुत क्या तगड़ा।।
नहीं खुदा तुम खुद को मानो।
रामभक्त हो झूठा जानो।
आने वाला समय दुधारी।
चाहे जितनी हो तैयारी।।
ख्वाब सभी अब धूल मिलेंगे।
पाप कर्म अब नहीं टलेंगे।।।
जनता जागी अब तुम जानो।
राम कृपा को फिर पहचानो।।
सत्य सामने आने वाला।
किया कर्म जो अब तक काला।।
करो नहीं अब गड़बड़ झाला।
बात हमारी मानो लाला।
सिंहासन मद छोड़ो जानी।
मरा आँख का सारा पानी।।
इतना दंभ नहीं है अच्छा।
कहीं पहनना पड़े न कच्छा।।
व्यर्थ गरजते जो तुम इतना।
लगता आज हो गए मतना।।
झूठा जाप राम का नामा
काला धंधा गोरा जामा।
वक्त बड़ा बलशाली होता।
भले तुम्हें लगता है सोता।।
वक्त कभी जब करवट लेता।
नहीं किसी को अवसर देता।
भूलो नहीं राम की महिमा।
कुर्सी की इतनी क्या गरिमा।।
बंद बुद्धि विवेक अब खोलो।
जय श्रीराम प्रेम से बोलो।।
