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मातृभूमि हमारी,स्नेह, संस्कृति और भाईचारे का अनूठा संगम

“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” अर्थात् जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं। हमारी मातृभूमि केवल मिट्टी का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह वह पवित्र आंचल है, जहाँ हर साँस में अपनापन, हर धड़कन में वंदना और हर संस्कृति में वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना बसती है। हमारी मातृभूमि की माटी में ममता है, इसकी हवाओं में संस्कारों की सुगंध है और इसके इतिहास में त्याग, बलिदान और अमर गाथाओं का गौरवशाली अध्याय है।
स्नेह और अपनापन,ममतामयी गोद,,,
मातृभूमि की परिभाषा केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, यह एक भावनात्मक जुड़ाव है। जिस प्रकार एक माँ अपने बच्चों को बिना किसी भेदभाव के अपना आंचल प्रदान करती है, उसी प्रकार हमारी मातृभूमि हर नागरिक को अपनी छाती से लगाकर रखती है। यहाँ की नदियाँ केवल जल नहीं बहातीं, बल्कि जीवन का अमृत सींचती हैं,यहाँ के खेत केवल अन्न नहीं उपजाते, बल्कि श्रम और स्नेह की कहानी कहते हैं। इसके कण-कण में रची-बची ममता हर व्यक्ति को कठिन से कठिन समय में भी संबल देती है।
संस्कृति और परंपराएं, विविधता में एकता,
हमारी मातृभूमि की सबसे बड़ी पहचान उसकी बहुरंगी और जीवंत संस्कृति है। यहाँ पग-पग पर पानी बदले और चार कोस पर वाणी बदले, फिर भी पूरा देश एक सूत्र में बंधा रहता है।
पर्व और उत्सव,, दीपावली का दीपपर्व, होली के सतरंगी रंग, ईद की सेवइयां, क्रिसमस के उल्लास और गुरुपर्व,यहाँ हर उत्सव को सब मिलकर मनाते हैं।
कला और संगीत,शास्त्रीय संगीत से लेकर लोकगीतों तक, और शास्त्रीय नृत्यों से लेकर लोक कलाओं तक, हमारी परंपराएं हमारे पूर्वजों के उच्च आदर्शों, प्रकृति प्रेम और जीवन दर्शन को दर्शाती हैं।
संस्कार,,,हमारे यहाँ अतिथि को भगवान (अतिथि देवो भव:) माना जाता है, बुजुर्गों का सम्मान और बड़ों का आशीर्वाद हमारी जीवनशैली का मुख्य आधार है।
आपसी भाईचारा,अनेकता में एकता की मिसाल
हमारी मातृभूमि की असली ताक़त यहाँ का आपसी भाईचारा और सामाजिक समरसता है। यहाँ विभिन्न जातियों, धर्मों, भाषाओं और संप्रदायों के लोग आपस में इस तरह घुल-मिलकर रहते हैं जैसे दूध में शक्कर।
सुख हो या दुख, हर आपदा और हर उत्सव में पूरा समाज एक परिवार की तरह खड़ा नजर आता है।
यह वही भूमि है जहाँ प्रेम, करुणा, क्षमा और सहिष्णुता को सर्वोच्च मानवीय मूल्य माना गया है। यहाँ की हवाओं में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और आदर की भावना घुली हुई है, जो किसी भी बाहरी आंधी या वैमनस्य के सामने अटूट दीवार बनकर खड़ी रहती है।
हमारी मातृभूमि हमारे अतीत का गौरव, वर्तमान का संबल और भविष्य का सपना है। इसकी रक्षा करना, इसके सम्मान को बनाए रखना और इसकी संस्कृति को संजोकर रखना हम सबका परम कर्तव्य है। आइए, इस पावन माटी को नमन करें और संकल्प लें कि इसके भाईचारे, संस्कृति और स्नेह रूपी प्राण को सदैव अक्षुण्ण बनाए रखेंगे।
“सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दुस्तान हमारा!”

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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