जितना ज़रूरी है
जितना ज़रूरी,
भोर की पहली किरण,
जागे विश्वास।
सूखी धरती,
बादल का कोमल स्पर्श,
जीवन हँसे।
नन्हा सा दीप,
अँधियारा हार गया,
मन उजियारा।
मौन प्रार्थना,
हवा में घुलती रहे,
शांति खिले।
सच्चे रिश्ते,
साँसों जैसे अनमोल,
सदा सँजोएँ।
करुणा की धार,
पत्थर भी पिघल उठे,
प्रेम अमर है।
ज्ञान का दीप,
राह नई दिखलाए,
सपने फलें।
क्षणभंगुर जग,
फूलों-सी मुस्कानें,
यही ज़रूरी।
— डॉ. अशोक
