Author: डॉ. अशोक कुमार शर्मा

हाइकु/सेदोका

ऊँचाई पर बने रहने के लिए कुछ ख़ास

बादलों के पारचुपचाप चलता मनहवा भी धीमी पहाड़ों की गोदसपनों की सीढ़ियाँचढ़ती साँसें धूप का स्पर्शचट्टानों पर लिखेधैर्य के शब्द

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हाइकु/सेदोका

तजूर्बा बहुत कुछ देती है

धूप में तपकरसीखा है जीवनरास्ता अपना काँटों की चुभनमुस्कान सिखातीसहना हरदम गिरकर संभलनाहर हार के बादजीत का स्वाद वक़्त की

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कविता

तजूर्बा एक खूबसूरत सीख देती हुई आगाज़ है

तजूर्बाचुपचाप चलकरज़िंदगी की किताब खोलता है गिरनाकमज़ोरी नहीं होतासमझ का पहला दरवाज़ा होता है हर चोटएक अनकही सीख हैजो भीतर

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