अतीत की यादें
पुरानी राहें,
धूप में सोई हुई,
मन टटोलता।
सूखे पत्तों में,
बीते वर्षों की गूँज,
धीरे बहती।
खिड़की के पास,
चाँदनी चुपके उतरे,
स्मृतियाँ जागें।
बरगद की छाँव,
बचपन हँसता दिखे,
क्षण लौट आएँ।
टूटी सी सीटी,
मिट्टी की वह खुशबू,
मन महकाए।
नदी किनारे,
पदचिह्न धुँधले हुए,
यादें शेष हैं।
संध्या के रंग,
अतीत के चित्र लिए,
नयन निहारें।
मौन रातों में,
स्मृति-पंख फैलाकर,
मन उड़ जाता।
— डॉ. अशोक
