अंदाजे गुफ्तगू क्या है?
चुप्पियों के बीच
जब शब्द साँस लेते हैं
वही गुफ्तगू है
नज़रें कह देती हैं
जो होंठ नहीं कह पाते
भावों की भाषा
हवा भी सुनती है
अनकहे सवालों को
धीरे-धीरे
दो दिलों के बीच
एक अदृश्य पुल सा
बन जाता है
कभी मुस्कान में
छिप जाता पूरा अर्थ
बिना शब्दों के
और कभी खामोशी
सब कुछ कह जाती है
बहुत गहराई से
यह संवाद नहीं
अनुभवों की यात्रा है
भीतर की ओर
जहाँ वाक्य नहीं
सिर्फ एहसास चलते हैं
धीमी धड़कन
हर ठहराव में
एक नया अर्थ खुलता
समझ के पार
अंदाज ही सब कुछ है
बाकी तो बहाना है
कहने-सुनने का
— डॉ. अशोक
