जाते-जाते एक आवाज की जरूरत थी
शाम की दहलीज़पगचिह्न धुँधलाए सेमन ठहर-सा गया राहें चुप खड़ीकदमों की आहट मेंएक पुकार रही धूप उतर चलीसाँझ की नरम
Read Moreशाम की दहलीज़पगचिह्न धुँधलाए सेमन ठहर-सा गया राहें चुप खड़ीकदमों की आहट मेंएक पुकार रही धूप उतर चलीसाँझ की नरम
Read Moreराहें थीं सीधीअचानक मुड़ गईंपवन के संग धूप के सायेचलते रहे कदमदिशा बदली सूखी सी मिट्टीअंकुर फिर भी फूटेआशा जगी
Read Moreशून्य की गोद मेंछिपा हुआ है जीवनएक अनकहा सत्य जहाँ कुछ भी नहींवहीं से सब कुछ जन्मेनए रूप लेते हैं
Read Moreबरसाती धाराकागज़ की छोटी नावसपने तैरें नन्हे से हाथपानी में छोड़तेखुशियाँ बहें मेघों की छाँवहँसी के संग बहतीनाव सुहानी गली
Read Moreदीया जलता है धीमी साँसों के साथहर लौ में एक नाजुक उम्मीद रहती हैहवा की हर टकराहट उसे हिला देती
Read Moreधीमी सी लहरहौसलों का सफ़रचुप सा साहस टूटे किनारेफिर भी बढ़ती राहआशा का दीप अधूरी राहेंकोशिशों की जीतमन में उजाला
Read Moreवक्त सिखाएधीरे चलनाझुक कर जीनासच को चुनना घमंड टूटेक्षण में अक्सरसमय दिखाएअसली दर्पण नर्म हवा साजीवन बहताजो झुक जातावही रहता
Read Moreशब्द जब थक जाएँ,मन स्वयं से बातें करे,मौन धीरे उतर आए। भीड़ के शोर में जबअर्थ खोने लगें,मौन ही सहेज
Read Moreछोटा सा कदमबदल दे दिशा पूरीहिम्मत का दीप गिरते हैं कईफिर उठ खड़े होतेजीत की राह धूप में तपकरसोना सा
Read Moreसन्नाटों में उलझे विचारहर मोड़ पर सवाल खड़े होते हैंराहें गुम होती हैं, मंज़िल दूर हैकदम थकते हैं, मन ढ़लता
Read More