कविता

कागज़ की कश्ती

कागज़ की कश्ती
भीगी नदियों पर चलती है
बालपन की हँसी में
समय तैरता जाता है

छोटे से हाथों की दुनिया
बड़ी उम्मीदें समेटे हुए
पानी की हर लहर में
एक नया सपना जन्म लेता है

बरसात की बूंदों में
यादें बहती रहती हैं
मिट्टी की खुशबू के साथ
दिल भीगता जाता है

नदी के किनारे बैठा बचपन
आँखों में चमक लिए
हर लहर को चुनौती देता
अपनी छोटी नाव से

हवा भी धीरे से छूती है
कागज़ की उस दुनिया को
जहाँ असंभव कुछ नहीं
सब कुछ सरल सा लगता है

पर वक्त की एक लहर
कश्ती को दूर ले जाती है
और बचपन वहीं रह जाता है
एक मीठी याद बनकर

— डॉ. अशोक

डॉ. अशोक कुमार शर्मा

पिता: स्व ० यू ०आर० शर्मा माता: स्व ० सहोदर देवी जन्म तिथि: ०७.०५.१९६० जन्मस्थान: जमशेदपुर शिक्षा: पीएचडी सम्प्रति: सेवानिवृत्त पदाधिकारी प्रकाशित कृतियां: क्षितिज - लघुकथा संग्रह, गुलदस्ता - लघुकथा संग्रह, गुलमोहर - लघुकथा संग्रह, शेफालिका - लघुकथा संग्रह, रजनीगंधा - लघुकथा संग्रह कालमेघ - लघुकथा संग्रह कुमुदिनी - लघुकथा संग्रह [ अन्तिम चरण में ] पक्षियों की एकता की शक्ति - बाल कहानी, चिंटू लोमड़ी की चालाकी - बाल कहानी, रियान कौआ की झूठी चाल - बाल कहानी, खरगोश की बुद्धिमत्ता ने शेर को सीख दी , बाल लघुकथाएं, सम्मान और पुरस्कार: काव्य गौरव सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, कविवर गोपाल सिंह नेपाली काव्य शिरोमणि अवार्ड, पत्राचार सम्पूर्ण: ४०१, ओम् निलय एपार्टमेंट, खेतान लेन, वेस्ट बोरिंग केनाल रोड, पटना -८००००१, बिहार। दूरभाष: ०६१२-२५५७३४७ ९००६२३८७७७ ईमेल - ashokelection2015@gmail.com

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