मुस्कुराता बचपन
बच्चों को खुलकर खिलखिलाने दो,
उनमें “आनंद” भाव जमकर रमने दो,
दौड़ता-कूदता, उछलता-खेलता,
मुस्कुराता बचपन अच्छा लगता है ।
बारिश की बूॅंदों संग छप-छप,
दोस्तों संग लंबी-लंबी गपशप,
नाचता-भीगता, खाता-बतीयाता,
मुस्कुराता बचपन अच्छा लगता है ।
रूपहलें सपनों की ऊॅंची उडान,
दुनिया की दुनियादारी से अंजान,
सपने गढ़ता-उड़ता, लिखता-पढता,
मुस्कुराता बचपन अच्छा लगता है ।
दादी-नानी की खट्टी-मीठी कहानी,
संस्कारों में सजती संवरती नादानी,
ढलता-पलता, गुनगुनाता-तलाशता,
मुस्कुराता बचपन अच्छा लगता है ।
तन-मन की थकावट हर लेता,
जीवन को खुशियों से भर देता,
चहकता-महकता, रुठता-मनाता,
मुस्कुराता बचपन अच्छा लगता है ।
— मोनिका डागा “आनंद”
