Author: *मोनिका डागा 'आनंद'

कविता

मुस्कुराता बचपन

बच्चों को खुलकर खिलखिलाने दो,उनमें “आनंद” भाव जमकर रमने दो,दौड़ता-कूदता, उछलता-खेलता,मुस्कुराता बचपन अच्छा लगता है । बारिश की बूॅंदों संग

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कविता

पर्यावरण हुआ कितना प्रदूषित

प्राकृतिक पर्यावरण हुआ कितना प्रदूषित,मनुष्य करते प्रकृति से छेड़छाड़ अनुचित,तीव्र तापमान से जल रहे धूॅं धूॅं कर जंगल,कॉंटे जा रहे

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