जगमग जलना सीखो तुम
अंधियारे में बन प्रकाश पुंज जगमग जलना सीखो तुम,टूटी हुई उम्मीदों को फिर से हँसकर चुनना सीखों तुम । जीवन
Read Moreअंधियारे में बन प्रकाश पुंज जगमग जलना सीखो तुम,टूटी हुई उम्मीदों को फिर से हँसकर चुनना सीखों तुम । जीवन
Read Moreरोज मिल रहे हैं बस नए-नए ज़ख्म,किसे कहें अपना दर्द खुलकर हम,आम आदमी तो टूट रहा है हर दिन,दैनिक जीवकोपार्जन
Read Moreतुम्ही हमारे माता-पिता और जीवन रक्षक हो,तुम्ही हमारे बंधु सखा और पापों के भक्षक हो,क्षमादान दिया नया जीवन दे नाथ
Read Moreजीवन में योग को अपनाइए, रोगों को दूर भगाइए,चेहरे की स्वर्णिम कांति संग जीवन “आनंद” बढ़ाइए ।चंचल मन को समझाइए,
Read Moreबाल मंच दक्षिण भारत इकाई की काव्य गोष्ठी संस्था के संस्थापक आदरणीय डॉ. नरेश नाज़ सर के सान्निध्य में 14
Read Moreहर मन कर रहा बेसब्री से बारिश का इंतजार,कब बरसेगी अंबर से अमृत की “आनंद” धार,नीले नभ में कब घिरेगी
Read Moreबच्चों को खुलकर खिलखिलाने दो,उनमें “आनंद” भाव जमकर रमने दो,दौड़ता-कूदता, उछलता-खेलता,मुस्कुराता बचपन अच्छा लगता है । बारिश की बूॅंदों संग
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