कविता

महेश नवमी (वंशोत्पत्ति दिवस)

तुम्ही हमारे माता-पिता और जीवन रक्षक हो,
तुम्ही हमारे बंधु सखा और पापों के भक्षक हो,
क्षमादान दिया नया जीवन दे नाथ औघड़दानी,
हमारी करूण प्रार्थनाएं मॉं-महादेव तुमने मानी ।

अपराध बोध पर हमनें की तेरी जो शरणागति,
ऋषि-मुनियों के भयंकर श्राप से पाई फिर मुक्ति,
महेश्वर तुमने हम अज्ञानियों को सहर्ष अपनाया,
छाप माहेश्वरी तुमसे तब वरदान स्वरुप में पाया ।

ज्येष्ठ शुक्ल तिथि नवमी को ये विशेष कृपा हुई,
माहेश्वरी जाति की उत्पत्ति शिव-शक्ति से ही हुई,
लोहार्गल माहेश्वरी वंशोत्पत्ति तीर्थ है कहलाया,
वाणिज्य कर्म को स्वीकार उद्देशय नवल पाया ।

सभी माहेश्वरी “आनंद” से उत्पत्ति पर्व मनाते,
महेश्वर-महेश्वरी के भजन-कीर्तन श्रद्धा से गाते,
पूर्वजों को धन्यवाद कर प्रभु का करते गुणगान,
श्रेष्ठ संस्कारी कर्मों से रखते कुल का मान-सम्मान ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु