कविता

योग को अपनाइए

जीवन में योग को अपनाइए, रोगों को दूर भगाइए,
चेहरे की स्वर्णिम कांति संग जीवन “आनंद” बढ़ाइए ।
चंचल मन को समझाइए, आलस्य को दूर हटाइए,
काया की गुणवत्ता संग अनेक विशेष लाभ भी पाइए ।

आज को जी जाइए, आने वाले कल को बेहतर बनाइए,
श्र्वासों की दिव्य साधना संग जीवन प्रभावी बनाइए ।
पौष्टिक आहार खाइए, सेहत तंदुरुस्त फुर्तीली बनाइए,
प्राणायाम के संग संकल्प की अदम्य शक्ति जगाइए ।

धन के पीछे मत भागिए, खुद के लिए भी थोड़ा जागिए,
स्वस्थ तन संग स्वस्थ मन परमात्मा से स्वतंत्र मांगिएं ।
स्वयं को योग शक्ति से जोड़िए, भोगों को शीघ्र छोड़िए,
नव चेतना व नव ऊर्जा संग मन सही दिशा में मोड़िए ।

सात्विक प्यार और बढ़ाइए, दिल को मजबूत बनाइए,
मानसिक शांति संग तनावों से मुक्ति सहज पाजाइए ।
आनंद को सर्वत्र फैलाइए, प्रभु को आभार जताइए,
शरीर की रख-रखाव संग माया से पीछा भी छुडा़इए।

अपनों को आप जुटाइए, योगाभ्यास के गुण गाइए,
ज्ञानमय जागरूकता संग योग सेवा का अवसर पाइए ।
गंभीर बीमारियों से बचजाइए, प्रतिदिन मौज मनाइए,
थकान अनिद्रा से राहत संग मन की खुशी सदा पाइए ।

झटपट तैयार हो जाइए, विचारों पर नियंत्रण पाइए,
शारीरिक तेज संग मन को और भी मजबूत बनाइए ।
योग की महत्ता समझजाइए, बच्चों को भी समझाइए,
परिवार संग मिलकर सभी दुर्गुणों को धूल चटाइए ।

देश को सशक्त बनाइए, योग विज्ञान को अपनाइए,
खुद की प्रगति संग देश का भविष्य उज्जवल बनाइए ।
वातावरण की अनुकूलता पाइए, खुलकर मुस्कुराइए,
पंच प्राणों संग योग की अनंत शक्तियों को स्वीकारिए ।

— मोनिका डागा “आनंद”

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु

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