तजूर्बा बहुत कुछ देती है
धूप में तपकर
सीखा है जीवन
रास्ता अपना
काँटों की चुभन
मुस्कान सिखाती
सहना हरदम
गिरकर संभलना
हर हार के बाद
जीत का स्वाद
वक़्त की चाल
धीरे समझ आती
गहरा सबक
रिश्तों की धूप
छाँव में दिखती
सच्चाई सारी
खामोश लम्हे
कितना कुछ कहते
अनकहे शब्द
अंधेरी रात
उजाला सिखाती
आशा की किरण
तजुर्बा कहे
चलते ही रहना
रुकना नहीं
— डॉ. अशोक
