बेटियाँ
घर-आँगन परिवार की, रौनक होती है बेटियाँ।। फुहारों-सी मनभावन सरगम, चहकती पायल की छमछम, मचलती कंगना की खनखन, मातु पिता
Read Moreधरती पर चंदा, बरसाता है प्यार। तारों से सजता, जगमग ये संसार। दमक रहें जुगनू, अँधियारा मिटाते– मनभावन छमछम, पायल
Read Moreये हम कहां जा रहे है? संवेदनाहीन, भावशून्य, पिशाच वृत्ति से लिपट, मानव जीवन की अस्थियां ले, संस्कारों की धज्जियां
Read Moreपैसा…पैसा….हर पल केवल व्यापार की चिंता। न समय पर सोना, न खाना। घर परिवार में सारे ऐषो आराम का इंतजाम
Read Moreजलते हैं हमसे, देख हमें चहकते। लोगों की फितरत, खुशी देख बिगडते।। मुस्कुराते जब हम, क्यों जलता हैं जिया। परम
Read Moreरवि किरणों का ताप, धूप झुलसाती। पशु पक्षी बेहाल, प्यास तरसाती।। लू से बचना आप, छाँस हैं पीना। बरगद की
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