चौपाई छंद
कागज स्याही प्रेम जताएँ। नैना झर-झर झरते जाएँ। विरहन मन में प्रीत हुलारे। चिठ्ठी में जड़ दूँ वे सारे।। प्रियतम
Read Moreगुरुवर के आशीष से, खिलता जीवन बाग। सप्त सुरों के साज से, गूँजे मधुरिम राग। ज्ञान रुपी संजीवनी, शिक्षा करे
Read Moreदिव्य प्रेम राधा का, भक्ति प्रेम मीरा का। बाजीराव मस्तानी, प्रेम हीर रांझा का।। प्रेम के रूप अनेक, माटी से
Read Moreकाली आँधी, तूफानी बारीश, घनघोर अँधेरा। कड़कड़ाती बिजली, बादलों की गड़गड़ाहट। झमाझम बरसती बूँदे और तेज हवा से महक का
Read Moreपरम ईश की रचनात्मकता, सृष्टि का अद्भुत स्वरूप, रंगबिरंगे फूल-पत्ते, तितलियाँ, प्रकृति के विविध रूप, छटाएँ रम्य सुनहरी, भोर की
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