खेलो खेल
स्वस्थ तन-मन के लिए खेलो खेल, विशुद्ध खेल भावना से खेलो खेल।। मैदानी खेल से होता है शारीरिक व्यायाम, बुद्धिबल
Read Moreरवि किरणों का ताप, धूप झुलसाती। पशु पक्षी बेहाल, प्यास तरसाती।। लू से बचना आप, छाँस हैं पीना। बरगद की
Read Moreनारी संस्कार बीज बोएगी, जब स्वयंसिद्धा हो जाएगी, मर्यादा की लक्ष्मण रेखा, आप ही खिंच जाएगी।। मर्यादा में रहें जब
Read Moreमाँ, ममता की मूरत, माँ, धरा का धीरज, माँ, ममत्व का आँचल, माँ, करुणा सागर।। माँ, प्रभु प्रतिरूप, माँ-सा न
Read Moreआज सुलेखा के पांव जमीं पर नहीं पड रहे थे। पाँखों में हौसले का बल भर ऊँची उड़ान भरने में
Read Moreअमरित हिय धारा, जीवन तारा, नेह फुलोरा, सुख दाता।। ईश्वर प्रतिरूपा, शक्ति स्वरूपा, छत्र अनूपा, प्रिय माता।। आँचल शुचि छाया,
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