कविता

भक्ति भावना

श्री राम प्रभु आएंगे,

सियाराम आएंगे,

हॄदय में हिलोर,

प्रभु स्वयं पधारेंगे।।

पग-पग पुष्प बिछा दूं,

कुटिया में आलोक भर दूं,

पलक पांवड़े बिछाऊं,

पुष्पमालाएं सजा दूं।।

लाये मीठे मीठे बेर,

चख-चख टोकरी में भर,

प्रभु जी को खिलाऊंगी,

करूंगी मैं मीठी मनुहार।।

चरणों में जीवन अर्पित,

प्रभु राम प्रिय पूजित,

अँखियों से बहे धारा,

मां शबरी अति हर्षित।।

बेर झूठे हैं, पर भाव भरे,

भक्ति रस पावन धार झरे,

श्रद्धा, आस्था देख प्रभु,

शबरी का जीवन उद्धार करे।।

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम विराजेंगे,

हो माता शबरी सी भक्ति-भावना,

दिव्य ज्योति संस्कृति, संस्कार की,

साकार होगी रामराज्य कल्पना।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८