लक्ष्मण रेखा
नारी संस्कार बीज बोएगी, जब स्वयंसिद्धा हो जाएगी, मर्यादा की लक्ष्मण रेखा, आप ही खिंच जाएगी।। मर्यादा में रहें जब
Read Moreनारी संस्कार बीज बोएगी, जब स्वयंसिद्धा हो जाएगी, मर्यादा की लक्ष्मण रेखा, आप ही खिंच जाएगी।। मर्यादा में रहें जब
Read Moreमाँ, ममता की मूरत, माँ, धरा का धीरज, माँ, ममत्व का आँचल, माँ, करुणा सागर।। माँ, प्रभु प्रतिरूप, माँ-सा न
Read Moreआज सुलेखा के पांव जमीं पर नहीं पड रहे थे। पाँखों में हौसले का बल भर ऊँची उड़ान भरने में
Read Moreअमरित हिय धारा, जीवन तारा, नेह फुलोरा, सुख दाता।। ईश्वर प्रतिरूपा, शक्ति स्वरूपा, छत्र अनूपा, प्रिय माता।। आँचल शुचि छाया,
Read Moreखिले-खिले हो पुष्प, धर्म अनुरागी मन में। सत्य शील सत्कर्म, भाव हो शुभ उपवन में।। महके चहके बाग, छाँव हो
Read Moreदान धर्म श्रेष्ठ कर्म, प्रीत पुष्प नेह मर्म, दंभ द्वेष हो न दर्प, धीर धैर्य धारिए।। रिद्धि सिद्धि बुद्धिमान, आन
Read Moreकुंडलियां छंद उलझे मन की डोर जब, हिय में हो संग्राम। योग ध्यान से ही सखा, मन पर कसे लगाम।।
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