त्रिभंगी छंद
पुष्पित शुभ दल में, निर्मल जल में, निश्चल मन प्रभु, वास करे। शुचि हो पावनता, हिय मानवता, तारण हारा, दुःख
Read Moreपुष्पित शुभ दल में, निर्मल जल में, निश्चल मन प्रभु, वास करे। शुचि हो पावनता, हिय मानवता, तारण हारा, दुःख
Read Moreगुरुवर के आशीष से, खिलता जीवन बाग। सप्त सुरों के साज से, गूँजे मधुरिम राग। ज्ञान रुपी संजीवनी, शिक्षा करे
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