वसुंधरा
अभिलाषा है मित्र, सजाऊँ वसुंधरा को। प्रतिभा का सम्मान, सहेजूँ ऋतंभरा को। हरे भरे हो वृक्ष, जीव आनंदी सारे। शिव
Read Moreगुरुवर के आशीष से, खिलता जीवन बाग। सप्त सुरों के साज से, गूँजे मधुरिम राग। ज्ञान रुपी संजीवनी, शिक्षा करे
Read Moreदिव्य प्रेम राधा का, भक्ति प्रेम मीरा का। बाजीराव मस्तानी, प्रेम हीर रांझा का।। प्रेम के रूप अनेक, माटी से
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