कविता

नन्हीं सी कलियां अलबेली!

रुमझुम-रुमझुम पायल छनकाती,

खनखन-खनखन कंगना खनकाती।।

छुई-मुई सी, चली सुहासिनी मतवाली,

प्यारी, दुलारी बिटिया रानी अलबेली।।

नटखट, नेह सागर भर-भर लायी,

प्रेम रस धार निर्मल छितराती आयी।।

प्रेम, प्रीत, अनुराग, स्नेहिल रेशम डोर, 

आनंद, उल्लास, उजास ले आती भोर।।

घर-आँगन की शोभा, दिल का स्पंदन,

घंटियों का निनाद,  मधुर गीत गूँजन।।

पापा की परियां, माणिक- मोती लड़ियाँ,

माता की परछाई, नन्हीं-सी कलियां।।

दिल की धड़कन, सहेजो प्रेमभाव से,

स्वाभिमानी, जिये सदा आत्मविश्वास से।।

रहें सुरक्षित हर मोड़ पर बालिकाएं,

सुशिक्षित, कल्याणी, स्वयंसिद्धा बन पाएं।।

— चंचल जैन

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८