बाला छंद
लेखनी सत्य झंकार साथी। लेखनी नेह शृंगार साथी।। निर्भया हिम्मती सार्थकी हो। दुर्जनों सी नहीं पातकी हो।। वर्तनी गैर है
Read Moreदिव्य प्रेम राधा का, भक्ति प्रेम मीरा का। बाजीराव मस्तानी, प्रेम हीर रांझा का।। प्रेम के रूप अनेक, माटी से
Read Moreकाली आँधी, तूफानी बारीश, घनघोर अँधेरा। कड़कड़ाती बिजली, बादलों की गड़गड़ाहट। झमाझम बरसती बूँदे और तेज हवा से महक का
Read Moreपरम ईश की रचनात्मकता, सृष्टि का अद्भुत स्वरूप, रंगबिरंगे फूल-पत्ते, तितलियाँ, प्रकृति के विविध रूप, छटाएँ रम्य सुनहरी, भोर की
Read Moreधरती पर चंदा, बरसाता है प्यार। तारों से सजता, जगमग ये संसार। दमक रहें जुगनू, अँधियारा मिटाते– मनभावन छमछम, पायल
Read Moreये हम कहां जा रहे है? संवेदनाहीन, भावशून्य, पिशाच वृत्ति से लिपट, मानव जीवन की अस्थियां ले, संस्कारों की धज्जियां
Read Moreपैसा…पैसा….हर पल केवल व्यापार की चिंता। न समय पर सोना, न खाना। घर परिवार में सारे ऐषो आराम का इंतजाम
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