हंसगति छंद
रवि किरणों का ताप, धूप झुलसाती। पशु पक्षी बेहाल, प्यास तरसाती।। लू से बचना आप, छाँस हैं पीना। बरगद की
Read Moreरवि किरणों का ताप, धूप झुलसाती। पशु पक्षी बेहाल, प्यास तरसाती।। लू से बचना आप, छाँस हैं पीना। बरगद की
Read Moreनारी संस्कार बीज बोएगी, जब स्वयंसिद्धा हो जाएगी, मर्यादा की लक्ष्मण रेखा, आप ही खिंच जाएगी।। मर्यादा में रहें जब
Read Moreमाँ, ममता की मूरत, माँ, धरा का धीरज, माँ, ममत्व का आँचल, माँ, करुणा सागर।। माँ, प्रभु प्रतिरूप, माँ-सा न
Read Moreआज सुलेखा के पांव जमीं पर नहीं पड रहे थे। पाँखों में हौसले का बल भर ऊँची उड़ान भरने में
Read Moreअमरित हिय धारा, जीवन तारा, नेह फुलोरा, सुख दाता।। ईश्वर प्रतिरूपा, शक्ति स्वरूपा, छत्र अनूपा, प्रिय माता।। आँचल शुचि छाया,
Read Moreखिले-खिले हो पुष्प, धर्म अनुरागी मन में। सत्य शील सत्कर्म, भाव हो शुभ उपवन में।। महके चहके बाग, छाँव हो
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