रासावलय छंद रचना
जलते हैं हमसे, देख हमें चहकते। लोगों की फितरत, खुशी देख बिगडते।। मुस्कुराते जब हम, क्यों जलता हैं जिया। परम
Read Moreजलते हैं हमसे, देख हमें चहकते। लोगों की फितरत, खुशी देख बिगडते।। मुस्कुराते जब हम, क्यों जलता हैं जिया। परम
Read Moreरवि किरणों का ताप, धूप झुलसाती। पशु पक्षी बेहाल, प्यास तरसाती।। लू से बचना आप, छाँस हैं पीना। बरगद की
Read Moreनारी संस्कार बीज बोएगी, जब स्वयंसिद्धा हो जाएगी, मर्यादा की लक्ष्मण रेखा, आप ही खिंच जाएगी।। मर्यादा में रहें जब
Read Moreमाँ, ममता की मूरत, माँ, धरा का धीरज, माँ, ममत्व का आँचल, माँ, करुणा सागर।। माँ, प्रभु प्रतिरूप, माँ-सा न
Read Moreआज सुलेखा के पांव जमीं पर नहीं पड रहे थे। पाँखों में हौसले का बल भर ऊँची उड़ान भरने में
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