बेटी
बेटी धन की पेटी मानो। घर-आँगन की रौनक जानो।। जन्म उसे लेने दो माता। शोभा आभा कृपा विधाता।।
Read Moreचहकेगा उपवन, महकेगा मधुबन, रात के बाद ही दिन, आएगा निश्चित जान।। मुरझाया चाहे बाग, फूलों में था अनुराग, सखा
Read Moreज्ञानी ऋषि मुनि हैं बडे, लेखन ललित प्रभास। विद्या दानी की कलम, भरती ज्ञान उजास।। भरती ज्ञान उजास, जिंदगी संवर
Read Moreझरने की झरझर-सा पावन स्वर, पंछी कलरव-सा मधुरिम स्वर, हो मन का स्वर निर्मल, निश्चल– मोहन की मुरली-सा मोहक सुर।।
Read Moreरंग रंग में उमंग, हैं सुवासिनी तरंग, आभ सुंदरी सुरेख, सृष्टि रूप साधिए।। पेड़ पौध वृक्ष ठाँव, मीत प्रेम नेह
Read Moreरहें नशे से दूर, विनाशी ये घातक भी। लूटे धन अनमोल, शांति का हैं नाशक भी।। मिटता घर परिवार, रोग
Read Moreमाया को जग पूजता, वैभव का गुणगान। रिश्ते फीके से लगे, निर्धन का अपमान।। निर्धन का अपमान, लड़े भाई-भाई से।
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