मन का स्वर
झरने की झरझर-सा पावन स्वर, पंछी कलरव-सा मधुरिम स्वर, हो मन का स्वर निर्मल, निश्चल– मोहन की मुरली-सा मोहक सुर।।
Read Moreझरने की झरझर-सा पावन स्वर, पंछी कलरव-सा मधुरिम स्वर, हो मन का स्वर निर्मल, निश्चल– मोहन की मुरली-सा मोहक सुर।।
Read Moreरंग रंग में उमंग, हैं सुवासिनी तरंग, आभ सुंदरी सुरेख, सृष्टि रूप साधिए।। पेड़ पौध वृक्ष ठाँव, मीत प्रेम नेह
Read Moreरहें नशे से दूर, विनाशी ये घातक भी। लूटे धन अनमोल, शांति का हैं नाशक भी।। मिटता घर परिवार, रोग
Read Moreमाया को जग पूजता, वैभव का गुणगान। रिश्ते फीके से लगे, निर्धन का अपमान।। निर्धन का अपमान, लड़े भाई-भाई से।
Read Moreशक्ति को पहचानिए, खूब कौशल पाइए, दुम क्यों यूँ दबाते हो, ज्ञानामृत पीजिए।। पीछे-पीछे आये कोई, शरारती आतताई, डटकर हो धुलाई,
Read Moreथाली पुष्पों से भरी, मीठी मिश्री भोग। श्रद्धा से पूजा करें, भक्ति भाव शुभ योग।। भक्ति भाव शुभ योग, भाग्य
Read Moreछोडो पाॅलीथीन का, करना अब उपयोग। धरती को बंजर करे, फैलाएं यह रोग।। फैलाएं यह रोग, छुपा बैरी जहरीला। दूषित
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