कडवा यथार्थ
हाय-हाय करते नित रहते। लूट-पाट कर वे जेबें भरते। दहशतगर्दी मकसद इनका– कलंकित मानवता करते।। खुद को वे सर्वश्रेष्ठ मानते।
Read Moreहाय-हाय करते नित रहते। लूट-पाट कर वे जेबें भरते। दहशतगर्दी मकसद इनका– कलंकित मानवता करते।। खुद को वे सर्वश्रेष्ठ मानते।
Read Moreप्यारे बच्चों,बचाना है बूँद-बूँद पानी, करो नहीं व्यर्थ मनमानी। जीवन दाता यह जल है, धारा पावन अति निर्मल है।। फूल पौध
Read Moreभोर लालिमा प्रभास, चेतना विभा उजास, ज्योति रश्मियां प्रकाश, ओस बूँद भीजिए।। धर्म कर्म प्रेम सेतु, धैर्य धार ज्ञान हेतु,
Read Moreहायकु शिव शंकर, करे जब तांडव, मिटे दानव।। कैलाश नाथ, सिर पर हो हाथ, तरे संसार।। बड़े बुजुर्ग, हो आदर
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