शिव
हर श्वास में है शिव,
हर आस में हैं शिव,
विश्वास में है शिव,
शिव ही है संरक्षक ।
अंतस प्रेरणा है शिव,
प्रेषक तत्व भी है शिव,
फलीभूत संकल्प है शिव,
शिव ही हैं मार्गदर्शक ।
जन्म उत्पत्ति है शिव,
अटल मृत्यु भी है शिव,
अनाहत नाद है शिव,
शिव ही है मोक्षकारक ।
आत्म बंधन है शिव,
प्राण प्रबंधन हैं शिव,
“आनंद” मिलन है शिव,
शिव ही है व्यवस्थापक ।
भूतकाल है शिव,
वर्तमान भी है शिव,
मंगलकारी है शिव,
शिव ही है कर्म संचालक ।
— मोनिका डागा “आनंद”
