स्वास्थ्य

दर्दनिवारक दवाओं का मायाजाल

दर्दनिवारक या दर्दनाशक दवाओं के बारे में मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूँ कि ये दवाइयाँ किसी दर्द को ठीक नहीं करतीं, बल्कि उस दर्द की सूचना हमारे मस्तिष्क को देनेवाले तन्तुओं को ही निष्क्रिय कर देती हैं या सुला देती हैं, जिससे हमें दर्द की सूचना नहीं मिल पाती और हम समझते हैं कि दर्द ठीक हो गया। परन्तु वास्तव में दर्द बिल्कुल भी कम नहीं होता, क्योंकि दर्द का जो मूल कारण होता है, वह अपने स्थान पर बना रहता है। कोई दर्दनिवारक दवा उस कारण को दूर नहीं करती, बल्कि वह केवल दर्द दूर होने का भ्रम पैदा कर सकती है।

वास्तव में हमें किसी दर्दनिवारक दवा की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि हम उस दर्द के मूल कारण को दूर करके सरलता से उस दर्द से स्थायी रूप से छुटकारा पा सकते हैं। कुछ समय पूर्व मैंने एक लेखमाला लिखी थी- ‘दर्दमुक्त जीवन’ जिसमें मैंने विभिन्न प्रकार के शारीरिक दर्दों से स्थायी मुक्ति पाने के सरल और व्यावहारिक उपाय बताये हैं। इस लेखमाला के लेखों का संकलन एक पुस्तिका के रूप में भी उपलब्ध है। यदि आपके पास यह पुस्तिका न हो, तो मुझसे मँगा सकते हैं। यदि आप इस पुस्तिका में बताये गये दर्दों के अलावा किसी अन्य प्रकार के दर्द से पीड़ित हों, तो भी मुझसे सलाह ले सकते हैं कि किस प्रकार उससे स्थायी छुटकारा पाया जा सकता है।

केवल इतना ही जानना पर्याप्त नहीं है कि दर्दनिवारक दवाओं से कोई दर्द ठीक नहीं होता, बल्कि यह भी जानना चाहिए कि अन्य सभी अंग्रेजी दवाओं की तरह दर्दनिवारक दवाओं का भी बुरा प्रभाव होता है, जो अन्य दवाओं की तुलना में कहीं अधिक होता है। इसका कारण यह है कि ये दवाएँ नशीले पदार्थों से बनायी जाती हैं, जिनके सेवन से हमारे शरीर में एक प्रकार का नशा छा जाता है। इसी नशे के कारण हमें दर्द का अनुभव नहीं होता या कम होता है। इन दवाओं को नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) कहा जाता है।

नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स के पांच आम उदाहरण हैं- इबुप्रोफेन, नेप्रोक्सन, एस्पिरिन, सेलेकॉक्सिब और डिक्लोफेनाक। ये दवाएं दर्द, सूजन और तेज़ बुखार को कम करने के लिए ली जाती हैं। इनमें से पहली तीन दवाएँ सीधे दवाओं की दूकान से बिना किसी डॉक्टरी पर्चे के खरीदी जा सकती हैं, जबकि अन्य दो दवाओं के लिए डॉक्टर का पर्चा आवश्यक होता है। ये दवाएँ कई ब्रांड नामों से मिलती हैं और सभी हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालती हैं- कोई कम तो कोई अधिक।

नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं (NSAIDs) के आम साइड इफेक्टों में पेट खराब होना, सीने में जलन और चक्कर आना शामिल हैं। हालांकि ये दर्द और सूजन में लाभदायक होती हैं, लेकिन इनके नियमित या अधिक मात्रा़ में उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे-

  1. पेट और आंतों से जुड़ी समस्याएं
    — पेट खराब होना- हल्का दर्द, गैस या जी मिचलाना।
    — अल्सर और ब्लीडिंग- पेट की परत में घाव होना, जिससे मल या उल्टी का रंग गहरा हो सकता है।
  2. दिल और ब्लड प्रेशर
    — हाई ब्लड प्रेशर- ब्लड प्रेशर बढ़ना या शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ (fluid) का जमा होना।
    — दिल से जुड़े जोखिम- हार्ट अटैक या स्ट्रोक का ज्यादा खतरा, खासकर लंबे समय तक उपयोग करने पर।
  3. किडनी और अन्य प्रभाव
    — किडनी पर दबाव- किडनी तक खून का बहाव कम होना, जिससे पैरों या पंजों में सूजन आ सकती है।
    — सिरदर्द और रैशेज़ (त्वचा पर चकत्ते)।

इन साइड इफक्टों का प्रमुख कारण यही है कि दर्दनिवारक दवायें प्रायः अफीम जैसी नशा करनेवाली वस्तुओं से बनायी जाती हैं। ओपिओइड दर्दनिवारक ऐसी दवाएं हैं, जो शरीर में दर्द संकेतों को अवरुद्ध करने के लिए सीधे अफीम पोस्त के पौधे (पापावर सोम्निफेरम) से प्राप्त की जाती हैं, या इसके प्राकृतिक घटकों से रासायनिक रूप से संशोधित की जाती हैं। ये दवाएं सख्ती से विनियमित प्रिस्क्रिप्शन दवाएं हैं (अर्थात् डॉक्टरी पर्चे के आधार पर ही मिलती हैं) जिनका उपयोग मध्यम से गंभीर दर्द के इलाज के लिए किया जाता है।

अफीम से जुड़ी दर्दनिवारक दवाओं को उनके उत्पादन के आधार पर कई श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है-

  1. प्राकृतिक ओपियेट्स- ये दर्द निवारक प्राकृतिक एल्कलॉइड हैं जो सीधे अफीम पोस्त के कच्चे राल से निकाले जाते हैं।
  2. मॉर्फिन- गंभीर दर्द के इलाज के लिए नैदानिक मानदंड माना जाता है, अक्सर बड़ी सर्जरी के बाद या गंभीर आघात के लिए अस्पतालों में उपयोग किया जाता है।
  3. कोडीन- एक हल्का दर्द निवारक, जिसे अक्सर हल्के से मध्यम दर्द के लिए निर्धारित किया जाता है या इसके रूप में उपयोग किया जाता है। यह एक कफ दमनकारी दवा भी है।

दर्दनिवारक दवाओं के पार्श्व प्रभावों और उनसे उत्पन्न होने वाले गम्भीर रोगों से बचने के लिए यह आवश्यक है कि हम इन दवाओं से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें और शारीरिक दर्दों को प्राकृतिक तथा घरेलू उपायों से शान्त करने का प्रयास करें, जिनका उल्लेख मेरी लेखमाला और पुस्तिका “दर्दमुक्त जीवन“ में किया गया है। दर्दनिवारक दवाओं के मायाजाल में न फँसना ही समझदारी है।

डॉ. विजय कुमार सिंघल
श्रावण कृ. 7, सं. 2083 वि. (दि. 5 अगस्त, 2026)

डॉ. विजय कुमार सिंघल

नाम - डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’ जन्म तिथि - 27 अक्तूबर, 1959 जन्म स्थान - गाँव - दघेंटा, विकास खंड - बल्देव, जिला - मथुरा (उ.प्र.) पिता - स्व. श्री छेदा लाल अग्रवाल माता - स्व. श्रीमती शीला देवी पितामह - स्व. श्री चिन्तामणि जी सिंघल ज्येष्ठ पितामह - स्व. स्वामी शंकरानन्द सरस्वती जी महाराज शिक्षा - एम.स्टेट., एम.फिल. (कम्प्यूटर विज्ञान), सीएआईआईबी पुरस्कार - जापान के एक सरकारी संस्थान द्वारा कम्प्यूटरीकरण विषय पर आयोजित विश्व-स्तरीय निबंध प्रतियोगिता में विजयी होने पर पुरस्कार ग्रहण करने हेतु जापान यात्रा, जहाँ गोल्ड कप द्वारा सम्मानित। इसके अतिरिक्त अनेक निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत। आजीविका - इलाहाबाद बैंक, डीआरएस, मंडलीय कार्यालय, लखनऊ में मुख्य प्रबंधक (सूचना प्रौद्योगिकी) के पद से अवकाशप्राप्त। लेखन - कम्प्यूटर से सम्बंधित विषयों पर 80 पुस्तकें लिखित, जिनमें से 75 प्रकाशित। अन्य प्रकाशित पुस्तकें- वैदिक गीता, सरस भजन संग्रह, स्वास्थ्य रहस्य। अनेक लेख, कविताएँ, कहानियाँ, व्यंग्य, कार्टून आदि यत्र-तत्र प्रकाशित। महाभारत पर आधारित लघु उपन्यास ‘शान्तिदूत’ वेबसाइट पर प्रकाशित। आत्मकथा - प्रथम भाग (मुर्गे की तीसरी टाँग), द्वितीय भाग (दो नम्बर का आदमी) एवं तृतीय भाग (एक नजर पीछे की ओर) प्रकाशित। आत्मकथा का चतुर्थ भाग (महाशून्य की ओर) प्रकाशनाधीन। प्रकाशन- वेब पत्रिका ‘जय विजय’ मासिक का नियमित सम्पादन एवं प्रकाशन, वेबसाइट- www.jayvijay.co, ई-मेल: jayvijaymail@gmail.com, प्राकृतिक चिकित्सक एवं योगाचार्य सम्पर्क सूत्र - 15, सरयू विहार फेज 2, निकट बसन्त विहार, कमला नगर, आगरा-282005 (उप्र), मो. 9919997596, ई-मेल- vijayks@rediffmail.com, vijaysinghal27@gmail.com

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