जिंदगी
प्रेम नेह पावन रस धारा, परमात्मा वर जिंदगी।
धर्म-कर्म मानवता अंतस, जीव दया हो बंदगी।।
कलकल बहता निर्मल झरना, सेवा संयम भावना।
स्वस्थ-मस्त हो जीवन सबका, उपकारी हिय कामना।।
जीवन सुंदर सुरभित बगिया,
हल्की-हल्की धूप हो।
अलि गुंजन मधुरिम मन भाता, तितली खिलता रूप हो।।
उल्लसित आनंदमयी हो, हर पल हर दिन जिंदगी।
मानव जीवन की सार्थकता, प्यारे हो साथी सँगी।।
