गीत/नवगीत

भारतीय गणतंत्र

सत्य मेव जयते है भारत का मूल मंत्र
७६ वर्षों का हो गया हमारा गणतंत्र
अब न कभी हों हम किसी के परतंत्र
जुग -जुग जिये भारतीय गणतंत्र ।।

२६ जनवरी सन् १९५० का शुभ दिन
भारत ने लोकतंत्र को किया अंगीकार
जनता की आवाज को मिली वरीयता
संविधान निर्माताओं की जय-जयकार

७७ वें वर्ष में आज हम प्रवेश कर रहे
तमाम उठा-पटक के दौर से गुजरे
लोकतंत्र पर कभी आंच न आने पायी
वक्त के साथ-साथ हम और भी निखरे

कई -कई युद्धों का किया सामना
एक बार तो हमें पड़ा भी हारना
लोकतंत्र की बागडोर संभाल कर रखी
आगे भी हम सबको है इसे संभालना।

यद्यपि आस-पड़ोस के तमाम देशों में
लोकतांत्रिक व्यवस्था हो गयी है ध्वस्त
सबसे बड़ी जनसंख्या होकर के भी
भारतीय लोकतंत्र बचाने में सिद्धहस्त

भारतीय संविधान है विश्व का श्रेष्ठतम
अधिकारों की सुरक्षा पर है विशेष बल
सभी वर्गों के हैं अधिकार बराबर से
न्यायिक व्यवस्था है अत्यंत प्रबल ।।

नियमित अंतराल पर यहां चुनाव होते
सबको मिलते समान लड़ने के मौके
आसानी से हो जाता सत्ता परिवर्तन
सभी प्रत्याशी अंत में जनता के भरोसे

लोकतंत्र में सबकी है प्रबल आस्था
इसीलिए चल रही यह सारी व्यवस्था
न थोपें हम किसी पर अपनी मनमर्जी
भले कितनी भी हो विपरीत अवस्था।

तमाम बाहरी शक्तियों की दखलंदाजी
हमें कमजोर करने पर सतत उतारू हैं
पर अपने मंसूबों में वह सफल न होंगी
हम भी सतर्क और भरपूर जुझारू हैं।

तानाशाही को पास भी फटकने न देंगे
लोकशाही पर ही विश्वास क़ायम रखेंगे
क्षणिक विपदाओं से न होंगे विचलित
राष्ट्र प्रथम भाव को ही तरजीह देंगे।

चाहे जितने भी व्यवधान आएं -जाएं
लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होती जाएं
भारतीय तिरंगा सदा शान से लहराए
गणतंत्र दिवस की अनंत शुभकामनाएं

लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होती जाएं
भारतीय तिरंगा सदा शान से लहराए

— नवल अग्रवाल

२६ जनवरी २०२६

*नवल किशोर अग्रवाल

इलाहाबाद बैंक से अवकाश प्राप्त पलावा, मुम्बई