राजनीति

हमारा गणतंत्र राष्ट्र की आत्मा और हमारी चेतना का प्रतीक है

हमारे देश का संविधान दुनिया का सबसे विस्तृत व्यवस्थित और लिखित संविधान है। हमारे देश का संविधान सबसे पहले देश को और उसके बाद समाज को फिर व्यक्ति को महत्त्व देता हैं। कानून में सब बराबर हैं। सरकारें अस्थिर हो सकती है किंतु देश का कानून स्थिर है। यह जनता का गणतंत्र है। हमारा संविधान सबको समान दृष्टि से देखता है यही  गणतंत्र की ताकत है। खूबी है। हमारे संविधान की अनेकता में एकता की खूबसूरती ही गणतंत्र का सौंदर्य है। हमारा संविधान देश के नियम-कायदों की संवैधानिक छत है। जिसके नीचे हर भारतवासी सुकून की ज़िंदगी जीता है। संविधान सिर्फ कानून का दस्तावेज नहीं बल्कि यह राष्ट्र की आत्मा और हमारी चेतना का प्रतीक है। गणतंत्र दिवस सिर्फ हर्षोल्लास का पर्व ही नहीं बल्कि संपूर्ण भारतवासियों का गौरव, समृद्धि और विकास की सीढ़ी का महापर्व है। हमारा गणतंत्र देश की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और संप्रभुता की याद दिलाता है। यह दिन संविधान के महत्त्व, पालन और देश की प्रगति तथा देश के गौरव की हमें याद दिलाता है। यह दिन देश के प्रति निष्ठा, देश की प्रगति का संकल्प और देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। 

      आजादी के बाद संविधान को बनने में संविधान सभा के कुल 11 सत्र हुए थे। कुल 165 दिन की बैठकें हुई थी। इस संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। संविधान के प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में संविधान का मसौदा तैयार किया गया था। डॉ.आंबेडकर ही वास्तविक संविधान के निर्माता थे। उन्होंने 2 वर्ष 11 मा 18 दिन के अथक प्रयासों से (1946 से 1949 के बीच के दौरान) 26 नवंबर 1949 को संविधान अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही भारत देश एक गणराज्य बना। हमारा गणतंत्र देश की स्वतंत्रता,धर्म निरपेक्षता और संप्रभुता की याद दिलाता है। यह दिन संविधान के महत्व, पालन, देश की प्रगति और देश के गौरव की हमें याद दिलाता है। यह दिन  देश के प्रति निष्ठा, देश की प्रगति का संकल्प, देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। 

   हमारा संविधान लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी है। हमारा लोकतंत्र सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता, लोक कल्याणकारी और समानता पर आधारित है। हमारा संविधान अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को परिभाषित भी करता है। वर्तमान में 440 से भी अधिक अनुच्छेद, जो 25 भागों में और 12 अनुसूचियां में वर्गीकृत हैं। संविधान हमारे लिए मूल अधिकार, स्वतंत्रता, न्यायपालिका, संघीय व्यवस्था और संसदीय प्रणाली की व्यवस्था करता है। हमारा संविधान अनेकता में एकता स्थापित करता है। डॉ.अंबेडकर ने संविधान को सामाजिक न्याय और समानता पर आधारित बनाकर महान कार्य किया था। हमारा संविधान लोकतंत्र की आत्मा है। राष्ट्र की आधारशिला है। जो एक राष्ट्र को मजबूत एकता प्रदान करता है। जिसकी वजह से इसे दुनिया का सबसे सुंदर संविधान होने का गौरव हासिल है। गणतंत्र को मजबूत बनाने की हम सब भारतीयों की जिम्मेदारी है। हमारा गणतंत्र मानवता का पाठ पढ़ाता है। सबको अधिकार देकर कर्तव्यों की अपेक्षा करता है। देश की एकता व अखंडता को कायम रखने की याद दिलाने का महापर्व ही गणतंत्र दिवस है। इस दिवस को मनाना भी तब सार्थक होगा जब प्रत्येक भारतवासी सुखी, शोषण मुक्त, समस्याओं से मुक्त अपराधों से मुक्त, सांप्रदायिक दंगों- फसादों से मुक्त, जाति-धर्म के झगड़ों से मुक्त, और यह समानता के सूत्र में बंधा हो। प्रेम, सद्भाव और भाईचारा से जुड़ा हो। विकसित राष्ट्र के रूप में संकल्पित हो।

आजादी के बाद में हमारे गणतंत्र ने बेशक उपलब्धियां हासिल की है। किंतु आज हमारे लोकतंत्र में हमारा संविधान खतरे में भी है। संविधान के मुताबिक चलना और संविधान को मजबूत बनाने का संकल्प प्रत्येक भारतीय को लेना होगा तभी भारत का लोकतंत्र अर्थात् हमारा गणतंत्र मजबूत होगा। आज आमजन की यह भागीदारी है कि वह देश प्रेम को आत्मसात करें। प्रत्येक भारतीय सद्ज्ञान और विवेक से जुड़ा रहे। नैतिकता को अपने जीवन में धारण करें। मानवता का पाठपढ़े और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपना निःस्वार्थ पूर्ण योगदान दे। आजादी के क्रांतिकारियों के सपनों पर खरे उतरे।

       लोकतंत्र में प्रत्येक दल अपना नैतिक कर्तव्य और सिद्धांत को स्थापित करें। जनता को बांटने का नहीं जोड़ने का काम करें। आदर्श व्यक्ति जब जुड़ता जाएगा तो आदर्श लोकतंत्र से आदर्श गणतंत्र अपने आप बनता जाएगा। स्वार्थ की राजनीति को त्याग कर राष्ट्र के हित के लिए जीना होगा। 

    हमारी आधी आबादी को संविधान तो अपने अधिकार देता है किंतु हमारा समाज हिचकिचाता है। समाज भी अगर साथ दे तो हमारा लोकतंत्र विश्व में सबसे सुंदर लोकतंत्र बन जाएगा। सरकारें भी अनेक योजनाओं से महिलाओं को लाभान्वित कर रही है। अभी महिला आरक्षण विधेयक 2023 के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक रूप से तथा नैतिक रूप से समाज व पुरुष साथ दे तो हमारा गणतंत्र बेजोड़ बन सकेगा। 

  बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का सपना था कि समता, न्याय,स्वतंत्रता और बंधुता पर आधारित संविधान हो जो हमें देखने को मिलता है। आज भी हमारा संविधान 76 वर्ष के बाद भी ज्यों के त्यों अपने महत्त्व के साथ खड़ा है। यह संविधान निर्माता की दूरदर्शिता की देन है। संविधान हमारे लिए आज भी प्रासंगिक हैं।

— डॉ. कान्ति लाल यादव

डॉ. कांति लाल यादव

सहायक प्रोफेसर (हिन्दी) माधव विश्वविद्यालय आबू रोड पता : मकान नंबर 12 , गली नंबर 2, माली कॉलोनी ,उदयपुर (राज.)313001 मोबाइल नंबर 8955560773