कुण्डलिया छंद
अनुभव से परिपक्वता, काम काज का ज्ञान। हटते पथ अवरोध भी, मिले जीत सम्मान।। मिले जीत सम्मान, भाग्य हो उजला
Read Moreअनुभव से परिपक्वता, काम काज का ज्ञान। हटते पथ अवरोध भी, मिले जीत सम्मान।। मिले जीत सम्मान, भाग्य हो उजला
Read Moreसुहानी भोर-सा अह्लड़पन ले, मासूम नटखट चुलबुलापन।। माँ का आँचल, पितृ छाया में, निर्मल, निश्चल खिलता बचपन।। खट्टा-मीठा सतरंगी जीवन
Read Moreमाटी की महक। गांव में रहते लोगों का भोलापन। लहलहाते खेत। गाय भैंस का रंभाना। बैलगाड़ी की सवारी। अमरूद, आम,
Read Moreशीत ऋतु चली आई, कलियां ले अंगडाई, मनमीता सोहनी, सृष्टि हरषाई।। अलबेली मनहर, मन मोहिनी सुंदर, रंगोली फूलों की सजी,
Read Moreभारत माँ के लाल हैं, सक्षम, चौकस वीर। राष्ट्र हित रक्षण करे, सजग शूर रणधीर।। सजग शूर रणधीर, प्राण न्यौछावर
Read Moreझरने की झर झर-सा पावन स्वर, पंछी कलरव-सा मधुरिम स्वर, हो मन का स्वर निर्मल, निश्चल– मोहन की मुरली-सा मोहक
Read Moreहमारी अनमोल धरोहर है हमारी संस्कृति। हमारे आचार, विचार, व्यवहार, सन्मति।। हमारी अनमोल धरोहर है कुटुंब प्रणाली। प्रेम, स्नेह बंधन,
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