कुण्डली/छंद

कुण्डलिया छंद

थाली पुष्पों से भरी, मीठी मिश्री भोग।

श्रद्धा से पूजा करें, भक्ति भाव शुभ योग।।

भक्ति भाव शुभ योग, भाग्य रेखा प्रभु रचते।।

जैसा हो निज कर्म, पुष्प जीवन में खिलते।।

जीवन प्रभु वरदान, कृपा करते श्री माली।।

भक्तों के भगवान, सजाओ पूजा थाली।।

ध्यानी ईश्वर को नमे, अंतस आस्था भक्ति।

जीवन नैया पार हो, भव सागर से मुक्ति।।

भव सागर से मुक्ति, भावना मन चहकाती।

मानवता हो भाव, सादगी जन महकाती।।

कठिन तपस्या जो करे, बुद्धि बल पाते ज्ञानी।

कृपा छत्र प्रभु का मिले, चरण रज धारे ध्यानी।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८