कलाधर घनाक्षरी
रंग रंग में उमंग, हैं सुवासिनी तरंग,
आभ सुंदरी सुरेख, सृष्टि रूप साधिए।।
पेड़ पौध वृक्ष ठाँव, मीत प्रेम नेह छाँव,
गीत प्रीत रंग साज, साथ हाथ थामिए।।
सोच ले विचार ले चले विकास राह पंथ,
ज्ञान ध्यान धार नाम, हेतु सत्य जानिए।।
आन बान शान मान राष्ट्र रक्षिता विधान,
जंग जीत का निदान, सार्थ आप मानिए।।
