कुण्डली/छंद

नशा नाश का कारण 

रहें  नशे  से  दूर,  विनाशी  ये  घातक भी।

लूटे धन अनमोल, शांति का हैं नाशक भी।।

मिटता घर परिवार, रोग जकड़े इतराता।

करते सब अपमान, बोझ जीवन बन जाता।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८