तख्त और ताज
तख्त पर विराजते ही, बदल जाता है मिजाज। बढ जाता रुबाब, रुतबा, सिरमौर हो जब ताज।। कर्मठता से जो करें,
Read Moreतख्त पर विराजते ही, बदल जाता है मिजाज। बढ जाता रुबाब, रुतबा, सिरमौर हो जब ताज।। कर्मठता से जो करें,
Read Moreफहराया ध्वज शान से, स्वतंत्रता उद्घोष। वीरों के बलिदान से, आजादी का तोष।। आजादी का तोष, जवानों के आभारी। चौकस
Read Moreछाया मौसम ठंड का, ठिठुरे हैं अब गात। सफर कठिन लगने लगा, खिलती नहीं प्रभात।। खिलती नहीं प्रभात, ध्यान से
Read Moreसुंदर था आँगन सजा, घर-घर महके फूल। खोई माटी की महक, उडती है अब धूल।। उडती है अब धूल, बंद
Read Moreअनुभव से परिपक्वता, काम काज का ज्ञान। हटते पथ अवरोध भी, मिले जीत सम्मान।। मिले जीत सम्मान, भाग्य हो उजला
Read Moreसुहानी भोर-सा अह्लड़पन ले, मासूम नटखट चुलबुलापन।। माँ का आँचल, पितृ छाया में, निर्मल, निश्चल खिलता बचपन।। खट्टा-मीठा सतरंगी जीवन
Read Moreमाटी की महक। गांव में रहते लोगों का भोलापन। लहलहाते खेत। गाय भैंस का रंभाना। बैलगाड़ी की सवारी। अमरूद, आम,
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