कविता

प्यारा बचपन

सुहानी भोर-सा अह्लड़पन ले,

मासूम नटखट चुलबुलापन।।

माँ का आँचल, पितृ छाया में,

निर्मल, निश्चल खिलता बचपन।।

खट्टा-मीठा सतरंगी जीवन में,

मनमौजी शरारती भोलापन।।

ताजगी भरा फूलों-सा महकता,

मनभावन ऋतु-सा बचपन।।

खिलखिलाती हँसी सोहन,

गोकुल का जैसे हो मन मोहन।।

बांसुरी की रागिनी, मधुर धुन-सा,

महकता, चहकता प्यारा बचपन।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८