सत्य शील से झंकृत जीवन
भोजन लेते भर-भरकर हम, थाली में।थोडा खाते बचा फेंकते, नाली में।व्यर्थ बहाकर पानी करते, नादानी–कूड़ा करकट अटका रहता, जाली में।।
Read Moreभोजन लेते भर-भरकर हम, थाली में।थोडा खाते बचा फेंकते, नाली में।व्यर्थ बहाकर पानी करते, नादानी–कूड़ा करकट अटका रहता, जाली में।।
Read Moreनवदुर्गा स्वागत बेला हैं, आओ रे। घडी मंगला घट घर-घर में, लाओ रे। मन में हर्षोल्लास खूब खुशियाँ छाई, उत्सव
Read Moreताजगी फूलों की, सौरभ है गृहिणी, बहारों का अलबेला मौसम है गृहिणी।। घर-परिवार की रौनक है गृहिणी, समस्या का सहज
Read Moreनशा नाश का कारण घातक, हैं जानो। बीडी, तंबाकू तन नाशक, हैं मानो। तन-मन जीवन यह संहारक, हत्यारा — धन
Read Moreपंखों में बल जोश हो, जिद जुनून विश्वास हो। बाहों में आकाश हो, सपनों का उल्लास हो। खुशियां हर दिल
Read Moreबदले हैं आजकल आजादी के मायने, अपने-अपने सजाये सबने शामियाने, आजादी को समझते हैं वे मनमानी, स्वच्छंदता की कैसी कलुषित
Read Moreभारत देश महान है, विश्व करे गुणगान। ज्ञानी, ध्यानी जन यहां, सबका हैं सम्मान।। सबका हैं सम्मान, भावना शुभ संस्कारी।
Read Moreसीखा हमने जीने का मंत्र, जीवन की पाठशाला में, देशप्रेम की ज्वाला धधकी, वीर रस पगी कहानियों में।। जीवन में हो
Read Moreआई बहना नेह ले, बाँधे रेशम डोर। मंगल हिय शुभ भावना, नाच रहा मन मोर।। नाच रहा मन मोर, भाल
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