ढलती शाम
” बाबुजी अब तक नहीं लौटे।” शिखा कब से बाबुजी की बांट जोह रही थी। “शेखर, रोज टहल कर समय
Read Moreशक्ति को पहचानिए, खूब कौशल पाइए, दुम क्यों यूँ दबाते हो, ज्ञानामृत पीजिए।। पीछे-पीछे आये कोई, शरारती आतताई, डटकर हो धुलाई,
Read Moreथाली पुष्पों से भरी, मीठी मिश्री भोग। श्रद्धा से पूजा करें, भक्ति भाव शुभ योग।। भक्ति भाव शुभ योग, भाग्य
Read Moreछोडो पाॅलीथीन का, करना अब उपयोग। धरती को बंजर करे, फैलाएं यह रोग।। फैलाएं यह रोग, छुपा बैरी जहरीला। दूषित
Read Moreतख्त पर विराजते ही, बदल जाता है मिजाज। बढ जाता रुबाब, रुतबा, सिरमौर हो जब ताज।। कर्मठता से जो करें,
Read Moreफहराया ध्वज शान से, स्वतंत्रता उद्घोष। वीरों के बलिदान से, आजादी का तोष।। आजादी का तोष, जवानों के आभारी। चौकस
Read Moreछाया मौसम ठंड का, ठिठुरे हैं अब गात। सफर कठिन लगने लगा, खिलती नहीं प्रभात।। खिलती नहीं प्रभात, ध्यान से
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