सूर घनाक्षरी छंद
शीत ऋतु चली आई,
कलियां ले अंगडाई,
मनमीता सोहनी,
सृष्टि हरषाई।।
अलबेली मनहर,
मन मोहिनी सुंदर,
रंगोली फूलों की सजी,
छटा मनभाई।।
झर झर आँसू बहे,
आकुल विरह सहे,
पिया बावरी सजनी,
सुध बिसराई।।
किया सोलह शृंगार,
हिय हुलरे हिलोर,
साजन झूलाये झूला,
खुशी लहराई।।
