सही मार्गदर्शन
“जब देखो आप उसकी ही बढ़ाई करती हो। आपका लाड़ला है, वह बेटा है न।” स्वाति के मन की पीडा
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Read Moreमिल-जुलकर त्योहार मनाएँ। हर्षित मानस मंगल गाएँ। सुर लय सरगम ताल सुरीला। हिय झंकृत खुशियों का मेला।। आओ चहुँ दिशि
Read Moreभोजन लेते भर-भरकर हम, थाली में।थोडा खाते बचा फेंकते, नाली में।व्यर्थ बहाकर पानी करते, नादानी–कूड़ा करकट अटका रहता, जाली में।।
Read Moreनवदुर्गा स्वागत बेला हैं, आओ रे। घडी मंगला घट घर-घर में, लाओ रे। मन में हर्षोल्लास खूब खुशियाँ छाई, उत्सव
Read Moreताजगी फूलों की, सौरभ है गृहिणी, बहारों का अलबेला मौसम है गृहिणी।। घर-परिवार की रौनक है गृहिणी, समस्या का सहज
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