ढोंगी बाबा
आज मोहल्ले में बड़ी रौनक थी। महान साधु संत नगरी में पधारे थे। उनके साथ बहुत सारे देसी-विदेशी भक्त भी थे। गांव वालों ने मिलकर उनके खान-पान की अत्त्युत्तम व्यवस्था की थी। उनके संभाषण, वक्तव्य, मीठे वचनों से प्रेरित होकर लोगों ने महात्मा जी के चरणों में बड़ी- बड़ी धनराशि अर्पित की थी।
सिलसिला चलता रहा। भोली-भाली जनता बड़ी तादाद में दर्शंन के लिए उमड़ने लगी थी।
आज अचानक सारे तंबू उखड़े देखकर लोगों को अपने ठगे जाने का एहसास हुआ।
पुलिस को बुलाया गया।
“कितने आदमी थे?”
पुलिस सबसे जानकारी ले रही थी।
“आप सब यथायोग्य सहकार्य कीजिये। ऐसे बहुरुपियों को पकड़ना बहुत जरूरी हैं।”
सब इतने अभिभूत थे कि कोई नहीं बता पा रहा था, कितने आदमी थे। जनता ने ढोंगी बाबा को भगवान जो मान लिया था।
