मन का स्वर
झरने की झर झर-सा पावन स्वर,
पंछी कलरव-सा मधुरिम स्वर,
हो मन का स्वर निर्मल, निश्चल–
मोहन की मुरली-सा मोहक सुर।।
मन मंदिर में प्रभु अर्चन हो झंकृत,
सुर लय समन्वय सुस्वर अलंकृत,
मानवता सेवा हित भाव हुंकार–
मन का स्वर हो नित मृदुल झंकार।।
परोपकारार्थ हो जीवन आचार,
जीव दया, करुणामय हो संसार,
शुभ मंगल सदाचारी हो आचरण–
सुर संगीत निनाद भ्रमर गुंजार।।
जैसा मन के स्वर, व्यक्तिमत्व होगा,
सुर से सुर मिल नव सृजन होगा,
सुर लय स्वर संग हिल-मिल जाये,
मनभावन सुस्वर सुरमई गीत होगा।।
