बाल कहानी

बाल कहानी – नैना अब स्कूल जायेगी

नैना सात साल की है। अपनी माँ के साथ लोगों से पैसा मांगती है। दौड़-दौड़ कर प्रत्येक कार के पास जाती। कोई दे देता, कोई नहीं देता। बेचारी दिनभर मां के साथ पैसा मांगती। कोई दिखता उसी के आगे हाथ फैला देती।

जब बच्चों को स्कूल जाते देखती। वह बहुत खुश हो जाती और अपनी मम्मी से स्कूल जाने के लिए कहती। पर मां उसको स्कूल न जाने की बात की। पर नैना स्कूल जाने की जिद करती। नैना मां से कहती-मैं पैसा मांग-मांगकर इकट्ठा करूंगी और स्कूल जाऊंगी।

अब नैना के मन में सिर्फ स्कूल रहता है। कभी-कभी सोते वक्त स्कूल-स्कूल चिल्लाती। मां बहुत परेशान हो जाती। एक रात मां खुद सोंचने लगी। इसके पापा होते तो जरूर स्कूल भेजते। जब नैना पेट में थी तो कहते रहते थे मैं अपने बच्चे को खूब पढ़ाऊंगा।

नैना की मां की आंखें भर आयी। मैं भले कष्ट सहूंगी लेकिन नैना के पापा के सपनों को मरने नहीं दूंगी। अगले दिन से नैना की मां कुछ पैसे नैना को स्कूल में दाखिला के लिए जोड़कर रखने लगी। नैना रोज स्कूल जाने के लिए कहती। मां सहमति से सिर हिला देती।

मां बेटी ने मिलकर पैसा लोगों से मांगा। आखिर वह शुभ घड़ी आ गयी। मां ने बेटी का एडमिशन कराया। बेटी इतनी खुश थी वह अपनी मां के गले में हाथ डालकर उसके गालों को चूम लिया और कहा- “मम्मी तुम दुनिया की सबसे प्यारी मम्मी हो। मैं खूब पढ़ूंगी।” मम्मी ने बेटी को गले लगा लिया। बेटी के स्कूल जाने के सपने सच होते देखकर मां के आंखों में आंसू छलक आये।

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com

One thought on “बाल कहानी – नैना अब स्कूल जायेगी

  • डॉ. विजय कुमार सिंघल

    सरकारी स्कूलों में कोई फीस नहीं लगती। दिन का खाना भी मिलता है और कॉपी किताबें फ्री।

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