हास्य-व्यंग्य – थोथा चना बाजे घना
एक लेखक मेरे एक साहित्यिक कथन पर उनकी आत्मा फट गयी। आंखें बड़ी-बड़ी हो गयी। हेय दृष्टि से देखने लगे।
Read Moreएक लेखक मेरे एक साहित्यिक कथन पर उनकी आत्मा फट गयी। आंखें बड़ी-बड़ी हो गयी। हेय दृष्टि से देखने लगे।
Read Moreरिमझिम बरस रहे बादलपानी से भरी-भरी धरतीखेतों में मेढक बोलेसब बच्चे कागज का नाव बनातेरंग-रंग के फूल खिलेहरियाली आई उपवन
Read Moreकभी मौका मिले तो चुगली करके देखिए कितना सकून मिलता है। हृदय तरोताजा हो जाता है जैसे-अभी अनार का जूस
Read Moreआसमान में घूमते बादलहवाओं के साथ लाते पानीबरस रहे हैं रुक- रुक करखेतों में हुआ पानीछप-छप करते बच्चे पानी मेंकिसानों
Read Moreअगर आप लेखक हैं और आपको पड़ोसी तक नहीं जानता है कि आप लेखक हैं तो बहुत दुख की बात
Read Moreमेहनत से मत भागोजीवन को एक यात्रा मानकरहर कदम हौंसला रखनाटूटना नहीं तुमखड़े रहना हैहर हालातों मेंलड़खड़ाना नहींएक मजबूत इरादों
Read Moreरवि एक अच्छा लड़का है। वह कभी लड़ाई झगड़ा नहीं करता है। दया का गुण भी है। संस्कारी है। कभी
Read Moreनैना सात साल की है। अपनी माँ के साथ लोगों से पैसा मांगती है। दौड़-दौड़ कर प्रत्येक कार के पास
Read Moreरिषभ साइकिल को देखकर मचल जाता था। वह भी साइकिल चलाना सीखना चाहता है। अभी दस साल का है। कोई
Read Moreरात में जुगनूंमस्ती करते हैंउड़ते हैं गगन में कभी इधर, कभी उधरदूर तक दौड़ लगाते हैं एक लम्बी उड़ानजुगनूं जब
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