Author: *जयचन्द प्रजापति

हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य – कवि कविता लिखकर अमर होना चाहता है

कवि कविता लिखकर अमर होना चाहता है। अपना भविष्य बनाना चाह रहा है। उसकी कविता से कोई सामाजिक परिवर्तन हुआ

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हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य : साहित्यकारों का पेंशन के लिए आवेदन शून्य

जैसे ही ही सूचना मिली कि साहित्यकारों को भी पेंशन दिया जायेगा। साहित्यकारों में खुशी की लहर दौड़ गयी।कुछ को

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हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य : विरह के कवि तथा नायिकाओं का संकट

आजकल की नायिकाओं को विरह-वेदना की अग्नि में नहीं जलना पड़ता है इसलिए वियोग के कवि की उत्पत्ति नहीं हो

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हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य – साहित्य अकादमी : मेरी मौत का तमाशा देखो

इस बार हिंदी की संस्मरण की पुस्तक पर साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिल गया। साहित्य जगत में कोई हल्ला नही

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संस्मरण

संस्मरण – निराला जी के दारागंज में कुछ महीने तक रहा हूँ

इलाहाबाद के दारागंज में निराला जी रहते थे। दारागंज एक खांटी इलाहाबाद है। एकदम सहज भावों से भरा है निरालाजी

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