हास्य-व्यंग्य : आनलाइन साड़ी का सपना
आनलाइन मिलने वाली साड़ी की तस्वीर देखकर हरिमोहन की पत्नी का हृदय गदगद हो गया। मन मयूर हो उठा। कितनी
Read Moreआनलाइन मिलने वाली साड़ी की तस्वीर देखकर हरिमोहन की पत्नी का हृदय गदगद हो गया। मन मयूर हो उठा। कितनी
Read Moreजब चूहे बिल्ली को देखते। डर के कारण सारे चूहे बिल में घुस जाते। जब तक बिल्ली नहीं जाती सारे
Read Moreभोली-सी चिड़िया आंगन में,अब कभी नहीं फुदकती है।चीं-चीं की आवाज नहीं आती,मस्ती के गीत नहीं सुनाती है। अब आंगन नहीं
Read Moreपानी-पानी हो गयी धरतीपानी ही पानी चारो ओर काग़ज़ का नाव बनातेचुनमुन और मुनमुन पानी की लहरों मेंनाव चलातेउछल-उछल करनाव
Read Moreआग की भट्टी मेंदही पका रहे हैं घर में आग लगी हैरसमलाई खा रहे हैं बाप बेटे पर तीर चला
Read Moreमालिक सेवाराम की तबियत बहुत खराब है। सांस चल रही है। आईसीयू में भर्ती हैं। एक बड़ी कंपनी के मालिक
Read Moreसाहित्य हमारा अंधेरे में है। आज के साहित्यकारों को पता नहीं है साहित्य का कौन सा वाद या युग चल
Read Moreमैं नवजुगाड़वाद का लेखक हूँ । ठंडा दूध भी फूंक-फूंककर पीता हूँ। उदार हृदय होने के कारण सरकार की बुराई
Read Moreमेढकी एक दिन मेढक से बोली,तुम ले चलो हमको नदी किनारे।ये गर्मी का मौसम जो आया है,नहाना चाहती हूँ मैं
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