Author: *जयचन्द प्रजापति

बाल कविता

1- बादल

बादल देखो,हवा में देखो।लहराते देखो,मंडराते देखो। गरजते देखो,टपकते देखो।बूंद-बूंद देखो,गांवों में देखो। जाते हुये देखो,बातें करते देखो।खेतों में देखो,झमाझम देखो।

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भाषा-साहित्य

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प्रगतिशील लेखक संघ, इलाहाबाद पुरानी उर्जा लिये हुये आगे बढ़ रही है। समय-समय पर साहित्यिक चर्चा कर लेती है। थोड़ा

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