बाल कविता : भोली-सी चिड़िया
भोली-सी चिड़िया आंगन में,अब कभी नहीं फुदकती है।चीं-चीं की आवाज नहीं आती,मस्ती के गीत नहीं सुनाती है। अब आंगन नहीं
Read Moreभोली-सी चिड़िया आंगन में,अब कभी नहीं फुदकती है।चीं-चीं की आवाज नहीं आती,मस्ती के गीत नहीं सुनाती है। अब आंगन नहीं
Read Moreपानी-पानी हो गयी धरतीपानी ही पानी चारो ओर काग़ज़ का नाव बनातेचुनमुन और मुनमुन पानी की लहरों मेंनाव चलातेउछल-उछल करनाव
Read Moreआग की भट्टी मेंदही पका रहे हैं घर में आग लगी हैरसमलाई खा रहे हैं बाप बेटे पर तीर चला
Read Moreमालिक सेवाराम की तबियत बहुत खराब है। सांस चल रही है। आईसीयू में भर्ती हैं। एक बड़ी कंपनी के मालिक
Read Moreसाहित्य हमारा अंधेरे में है। आज के साहित्यकारों को पता नहीं है साहित्य का कौन सा वाद या युग चल
Read Moreमैं नवजुगाड़वाद का लेखक हूँ । ठंडा दूध भी फूंक-फूंककर पीता हूँ। उदार हृदय होने के कारण सरकार की बुराई
Read Moreमेढकी एक दिन मेढक से बोली,तुम ले चलो हमको नदी किनारे।ये गर्मी का मौसम जो आया है,नहाना चाहती हूँ मैं
Read Moreहे कवि !जो गीत लिखे तुमवो भावों के गीत लिखे जीवन के रूप मेंनये तराने लिखे आपका जानाएक युग का
Read Moreप्रगतिशील लेखक संघ, इलाहाबाद पुरानी उर्जा लिये हुये आगे बढ़ रही है। समय-समय पर साहित्यिक चर्चा कर लेती है। थोड़ा
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