कविता

मां वीर योद्धा होती है

मां तो माँ है
चाहे वो किसी छप्पर में रहती हो
या किसी राजमहल में

वह मां होती है
अपने बच्चों के लिए
बच्चा चाहे कैसा हो

लूला हो चाहे लंगड़ा हो
गूंगा हो या बहरा
मां का प्यार

करोड़ों कीमती चीज से भी
उसका प्यार तौला नहीं जा सकता है
उसका प्यार
जान की परवाह नहीं करता है

खुद आहुति दे सकता है
दुनिया की हर थपेड़ों से
लड़कर
अपने लाल के लिए
खुद को मिटा सकती है

सुरक्षा कवच होती है मां
युध्द में
ढाल की तरह होती है मां
सच में मां
एक वीर योद्धा होती है

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com

Leave a Reply