कविता

प्रतापगढ़ की बिटिया

प्रतापगढ़ की बिटिया
बेहद लाचार
पढ़ना चाहती है

दुनिया की बच्चियों की तरह
वह भी जाना चाहती है स्कूल

वह भी उड़ान
भरना चाहती है
नये क्षितिज का
वह निर्माण करना चाहती है

पर अफ़सोस!
जिसे भरपेट भोजन न मिलता हो

किताबें तथा फीस
कहाँ से आयेगा

लाचारी का दर्द
कौन सुनेगा?

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com