हास्य-व्यंग्य – पति कल्याण योजना
सोना कम खरीददारी करने का आह्वान सुन कर पतियों में खुशी की लहर दौड़ गयी है। कुछ तो झूम उठे कि ऐसे युध्द होते रहेंगे तो सोने खरीदने के दिन चले जायेंगे और जो पति दो रोटी खाते थे अब पांच रोटियां रगड़ दे रहे हैं। वे जान रहे हैं कि अब सोना खरीदना नहीं है जो पैसा बचेगा वह अपने सेहत पर खर्चा किया जायेगा।
आखिर आ ही गये सुख के दिन। यह पतियों के कल्याणकारी योजनाओं के लिए लांच की गयी बहुत बढ़िया स्कीम है। इससे खुशहाली आयेगी। बैंक बैलेंस में वृद्धि होगी। अब पत्नियां पतियों पर सोना खरीदने का दबाव नहीं नहीं बना सकती है।
दुखीराम जिस दिन से यह खबर सुन रखें हैं कि सोने की खरीददारी से बचें। दुखीराम आज बहुत प्रसन्न मुद्रा में हैं। कई मंदिरों में पूजा पाठ भी कर आये और हफ्ते में दो दिन व्रत रहने का संकल्प लिया कि हमारी सरकार को ऐसी सद्बुद्धि हमेशा के लिए बनी रहे ताकि हम लोग पत्नियों द्रारा सोने के नाम पर प्रताड़ित न हो सके। अब पत्नी की चली आ रही कई वर्षों से झुमके की मांग स्थगित हो जायेगी। यह राहत भरी खबर है।
यह समाचार सुशीला के ऊपर गिरा वज्रपात से कम नहीं है। वियोग रस से परिपूर्ण खबर जब से सुनी है। उसका ह्रदय और मन बहुत बुझा-बुझा सा हो रहा है। वह कई सालों से सपना बना रखी है एक झुमके का और वादा के मुताबिक पति महोदय का इस बार देने का प्लान चल रहा था। इसी समय पर यह जरूरी खबर भी बुरी खबर से कम नहीं।
पतियों ने जगह-जगह जुलूस निकाले हैं और इसको एक देशव्यापी सरकारी सूचना को समझ कर पतियों को जागरूक किया जा रहा है। सरकार का यह नियम कल्याणकारी योजनाओं में से एक है जो पतियों के चेहरे पर मुस्कान लाने में कामयाब है। पतियों के लिए यह खबर एक खुशी की लहर से कम नहीं है।
— जयचन्द प्रजापति ‘जय’
