कुण्डली/छंद दोहा मुक्तक *चंचल जैन 28/01/202628/01/2026 प्रतिभा कौशल से बढ़े, गौरव गरिमा शान। काम देश के आ सकूं, ऊँची भरूँ उड़ान। मानवता पुष्पित रहें, करुणा नेह बहार– ज्ञान-गंग बहती रहें, ऐसा दो वरदान।।