कुण्डली/छंद

कुंडलिया छंद

ज्ञानी ऋषि मुनि हैं बडे, लेखन ललित प्रभास। 

विद्या दानी की कलम, भरती ज्ञान उजास।।

भरती ज्ञान उजास, जिंदगी संवर जाती।

करते दोष सुधार, दीप की तेजस बाती।।

बगिया की मुस्कान, शांत वे योगी ध्यानी।

माली भले सुजान, कुशल शिक्षक वे ज्ञानी।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८