हायकु
शिव शंकर,
करे जब तांडव,
मिटे दानव।।
कैलाश नाथ,
सिर पर हो हाथ,
तरे संसार।।
बड़े बुजुर्ग,
हो आदर सम्मान,
संस्कार शान।।
बरगद वे,
चट्टान-से अटल,
गंग निर्मल।।
घर की नींव,
शीतल घनी छाँव,
अपने बड़े।।
जड़ से जुडो,
नेहिल पतवार,
नैया हो पार।।
हायकु
शिव शंकर,
करे जब तांडव,
मिटे दानव।।
कैलाश नाथ,
सिर पर हो हाथ,
तरे संसार।।
बड़े बुजुर्ग,
हो आदर सम्मान,
संस्कार शान।।
बरगद वे,
चट्टान-से अटल,
गंग निर्मल।।
घर की नींव,
शीतल घनी छाँव,
अपने बड़े।।
जड़ से जुडो,
नेहिल पतवार,
नैया हो पार।।