मुक्तक – ऐसा दो वरदान
प्रतिभा कौशल से बढ़े, गौरव गरिमा शान।
काम देश के आ सकूं, ऊँची भरूँ उड़ान।
मानवता पुष्पित रहें, करुणा नेह बहार–
ज्ञान-गंग बहती रहें, ऐसा दो वरदान।।
प्रतिभा कौशल से बढ़े, गौरव गरिमा शान।
काम देश के आ सकूं, ऊँची भरूँ उड़ान।
मानवता पुष्पित रहें, करुणा नेह बहार–
ज्ञान-गंग बहती रहें, ऐसा दो वरदान।।