रोला छंद
डूब रही है नाव, नहीं दिख रहा किनारा।
कोई नहीं सहाय, बना किस्मत का मारा।।
समय समय की बात, व्यर्थ अब जीवन लगता।
टूट रही अब आस, बनूँ क्या ईश्वर भक्ता।।१०२
परनिन्दा में लीन, सभी हैं देखो इतना।
करें न चिंता आज, यही अब जीवन अपना।।
कहें मित्र यमराज, चलो अभियान चलाएँ।
परनिंदा का लाभ, सभी को मिल बतलाएँ।।१०२
दोष खोजते लोग, गुणों से आँख चुराते।
अपना शीशा पोंछ, धूल यह आप लगाते।।
कहें मित्र यमराज, सुनी क्या बात पुरानी।
निंदा रस में डूब, हमारी मति बौरानी।।१०३
निंदा मीठा जहर, चखे जो सब बौराए।
खुद का घर अँधियार, पड़ोसी दीप बुझाए।।
छोड़ो निंदा-राग, भजन हम सब मिल गाएँ।
निज जीवन का साज, प्रेम से आप सजाएँ।।१०४
पावन मन के लोग, आज कितने हैं मिलते।
कहाँ किसी को आज, सरल हम आप समझते।।
कहें मित्र यमराज, व्यर्थ लगता है सावन।
बीते दिन की बात, सभी थे जब मनभावन।।१०५
आया कोई द्वार, ध्यान इसका भी रखिए।
अपने कुंठित भाव, छोड़कर स्वागत करिए।।
कहें मित्र यमराज, मान तू कहना भाया।
यह तेरा सौभाग्य, और तू है शरमाया।।१०६
इसका समझो मूल्य, प्राण मत आप गँवाओ।
निज जीवन का मोल, आज खुद को समझाओ।।
कहें मित्र यमराज, भाव अब नहीं गिराओ।
रखता इतना ध्यान, मान उच्चतम लाओ।।१०७
अपने से ही आज, मुझे अब घोर निराशा।
तुझसे सब अरमान, एक अंतिम है आशा।।
कहें मित्र यमराज, छोड़ना देख न सपने।
बड़े धैर्य के साथ, सोच कितने अब अपने।।१०८
करती अपना काम, धरती के संग में यारी।
होती है बदनाम, समझती दुनिया दारी।।
रखें धैर्य हम आप, यही नौ तपा सिखाता।
नीति नियम को छोड़, भला पथ दूजा जाता।।१०९
बरस रही है आग, परेशाँ प्राणी सारे।
कहें जोड़कर हाथ, नौतपा जाओ प्यारे।।
विनय करें यमराज, सभी सुरक्षित रहिए।
नाहक ही तकरार, आप इससे मत करिए।।११०
