लघुकथा

सफलता मिलेगी जरूर!

अमोल, पढ़ने के लिए मुंबई आया था। गाँव में हिन्दी माध्यम से पढ़ाई हुई थी।

छोटा-सा गाँव था उसका। शहर आया था अपने भाई के साथ, सहमा-सहमा सा, थोडा-सा डरा हुआ।

हिन्दी में सबके साथ बातचीत करते वह असहज महसूस कर रहा था।

अंग्रेजी भाषा का ज्ञान था उसे,

पर फटाफट बोलने में उसे दिक्कत होती।

गाँव में उसके बुद्धिमत्ता, उसके कौशल की वाह-वाह होती।

आडंबर और दिखावटी दुनिया की रंगीनियों में वह बुझा-बुझा सा हो गया था।

अपने सतरंगी सपने हाथ से फिसलते नजर आ रहें थे उसे। 

उसके अपने गाँव के अध्यापक श्रीमान जय सर जी ने उसकी पीड़ा भांप ली थी।

“उलझनें सुलझानी हैं अपनी समझ-बुझ से।

घबराकर अपनी राह भूल जाना, अक्लमंदी नहीं।

जिस उद्देश्य से आये हो, लगे रहो। प्रयास करते रहो।

किसी की बात से हताश होने के बजाय, हिम्मत और हौसले के साथ आगे बढ़ो। 

सफलता तुम्हें जरूर मिलेगी।”

नव उत्साह से वह परीक्षा की तैयारी करने लगा।

परीक्षा फल आया तो सब अचरज से देखते रहें।

सीधा-साधा, गाँव का लड़का आज अव्वल आया था।

हर्षातिरेक से ऑंखें नम हो गयी थी।

हिन्दी भाषा में पढ़कर भी सफलता मिलती हैं।

जरूरत है आत्मविश्वास, जिद, लगन, परिश्रम, सतत अभ्यास की।

अमोल आज सफलता के शिखर पर विराजमान है। 

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८